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By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब PM Modi Speech: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोविड-19 महामारी फैलने के बाद से कई बार देश को संबोधित कर चुके हैं. इस दौरान उन्होंने लोगों को सुझाव दिए और कई बार नई घोषणाएं भी की हैं.PM Modi Speech: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देश को संबोधित करते हुए कहा कि 21 जून, सोमवार से देश के हर राज्य में, 18 वर्ष से ऊपर की उम्र के सभी नागरिकों के लिए, भारत सरकार राज्यों को मुफ्त वैक्सीन मुहैया कराएगी.1. पीएम ने कहा कि बीते सौ वर्षों में आई ये सबसे बड़ी महामारी है, त्रासदी है.इस तरह की महामारी आधुनिक विश्व ने न देखी थी, न अनुभव की थी. इतनी बड़ी वैश्विक महामारी से हमारा देश कई मोर्चों पर एक साथ लड़ा है.2. पीएम मोदी ने कहा कि सेकेंड वेव के दौरान अप्रैल और मई के महीने में भारत में मेडिकल ऑक्सीजन की डिमांड अकल्पनीय रूप से बढ़ गई थी. भारत के इतिहास में कभी भी इतनी मात्रा में मेडिकल ऑक्सीजन की जरूरत महसूस नहीं की गई. इस जरूरत को पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर काम किया गया. सरकार के सभी तंत्र लगे.3. पीएम मोदी ने कहा कि आज पूरे विश्व में वैक्सीन के लिए जो मांग है, उसकी तुलना में उत्पादन करने वाले देश और वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां बहुत कम हैं. कल्पना करिए कि अभी हमारे पास भारत में बनी वैक्सीन नहीं होती तो आज भारत जैसे विशाल देश में क्या होता? आप पिछले 50-60 साल का इतिहास देखेंगे तो पता चलेगा कि भारत को विदेशों से वैक्सीन प्राप्त करने में दशकों लग जाते थे. विदेशों में वैक्सीन का काम पूरा हो जाता था तब भी हमारे देश में वैक्सीनेशन का काम शुरू नहीं हो पाता था.4. पीएम मोदी ने कहा कि देश में 23 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन की डोज दी जा चुकी है. पिछले काफी समय से देश लगातार जो प्रयास और परिश्रम कर रहा है, उससे आने वाले दिनों में वैक्सीन की सप्लाई और भी ज्यादा बढ़ने वाली है. आज देश में 7 कंपनियाँ, विभिन्न प्रकार की वैक्सीन्स का प्रॉडक्शन कर रही हैं. तीन और वैक्सीन्स का ट्रायल भी एडवांस स्टेज में चल रहा है. वैक्सीन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए विदेशी कंपनियों से वैक्सीन खरीदने में तेजी लाई गई है. बच्चों के लिए वैक्सीन का भी ट्रायल चल रहा है. नेजल वैक्सीन पर भी ट्रायल चल रहा है. देश को अगर सफलता मिलती है तो इससे टीकाकरण में और तेजी आएगी. इतने कम समय में वैक्सीन बनाना पूरी मानवता के लिए बड़ी उपलब्धी है. लेकिन इसकी सीमाएं हैं.5. पोलियो की वैक्सीन हो, चेचक की वैक्सीन हो, हेपेटाइटिस बी की वैक्सीन हो, इनके लिए देशवासियों ने दशकों तक इंतजार किया था. 2014 में जब देशवासियों ने हमें सेवा का अवसर दिया तो भारत में वैक्सीनेशन का कवरेज सिर्फ 60 प्रतिशत के आसपास था. हमारी दृष्टि में ये चिंता की बात थी. जिस रफ्तार से भारत का टीकाकरण चल रहा था, उस हिसाब से देश को शत-प्रतिशत टीकाकरण कवरेज का लक्ष्य हासिल करने में करीब 40 साल लग जाते. हमने इस समस्या के समाधान के लिए मिशन इंद्रधनुष को शुरु किया.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोविड-19 महामारी फैलने के बाद से कई बार देश को संबोधित कर चुके हैं. इस दौरान उन्होंने लोगों को सुझाव दिए और कई बार नई घोषणाएं भी की हैं.

By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब

PM Modi Speech: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोविड-19 महामारी फैलने के बाद से कई बार देश को संबोधित कर चुके हैं. इस दौरान उन्होंने लोगों को सुझाव दिए और कई बार नई घोषणाएं भी की हैं.

PM Modi Speech: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देश को संबोधित करते हुए कहा कि 21 जून, सोमवार से देश के हर राज्य में, 18 वर्ष से ऊपर की उम्र के सभी नागरिकों के लिए, भारत सरकार राज्यों को मुफ्त वैक्सीन मुहैया कराएगी.

1. पीएम ने कहा कि बीते सौ वर्षों में आई ये सबसे बड़ी महामारी है, त्रासदी है.


इस तरह की महामारी आधुनिक विश्व ने न देखी थी, न अनुभव की थी. इतनी बड़ी वैश्विक महामारी से हमारा देश कई मोर्चों पर एक साथ लड़ा है.


2. पीएम मोदी ने कहा कि सेकेंड वेव के दौरान अप्रैल और मई के महीने में भारत में मेडिकल ऑक्सीजन की डिमांड अकल्पनीय रूप से बढ़ गई थी. भारत के इतिहास में कभी भी इतनी मात्रा में मेडिकल ऑक्सीजन की जरूरत महसूस नहीं की गई. इस जरूरत को पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर काम किया गया. सरकार के सभी तंत्र लगे.


3. पीएम मोदी ने कहा कि आज पूरे विश्व में वैक्सीन के लिए जो मांग है, उसकी तुलना में उत्पादन करने वाले देश और वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां बहुत कम हैं. कल्पना करिए कि अभी हमारे पास भारत में बनी वैक्सीन नहीं होती तो आज भारत जैसे विशाल देश में क्या होता? आप पिछले 50-60 साल का इतिहास देखेंगे तो पता चलेगा कि भारत को विदेशों से वैक्सीन प्राप्त करने में दशकों लग जाते थे. विदेशों में वैक्सीन का काम पूरा हो जाता था तब भी हमारे देश में वैक्सीनेशन का काम शुरू नहीं हो पाता था.


4. पीएम मोदी ने कहा कि देश में 23 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन की डोज दी जा चुकी है. पिछले काफी समय से देश लगातार जो प्रयास और परिश्रम कर रहा है, उससे आने वाले दिनों में वैक्सीन की सप्लाई और भी ज्यादा बढ़ने वाली है. आज देश में 7 कंपनियाँ, विभिन्न प्रकार की वैक्सीन्स का प्रॉडक्शन कर रही हैं. तीन और वैक्सीन्स का ट्रायल भी एडवांस स्टेज में चल रहा है. वैक्सीन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए विदेशी कंपनियों से वैक्सीन खरीदने में तेजी लाई गई है. बच्चों के लिए वैक्सीन का भी ट्रायल चल रहा है. नेजल वैक्सीन पर भी ट्रायल चल रहा है. देश को अगर सफलता मिलती है तो इससे टीकाकरण में और तेजी आएगी. इतने कम समय में वैक्सीन बनाना पूरी मानवता के लिए बड़ी उपलब्धी है. लेकिन इसकी सीमाएं हैं.


5. पोलियो की वैक्सीन हो, चेचक की वैक्सीन हो, हेपेटाइटिस बी की वैक्सीन हो, इनके लिए देशवासियों ने दशकों तक इंतजार किया था. 2014 में जब देशवासियों ने हमें सेवा का अवसर दिया तो भारत में वैक्सीनेशन का कवरेज सिर्फ 60 प्रतिशत के आसपास था. हमारी दृष्टि में ये चिंता की बात थी. जिस रफ्तार से भारत का टीकाकरण चल रहा था, उस हिसाब से देश को शत-प्रतिशत टीकाकरण कवरेज का लक्ष्य हासिल करने में करीब 40 साल लग जाते. हमने इस समस्या के समाधान के लिए मिशन इंद्रधनुष को शुरु किया.


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोविड-19 महामारी फैलने के बाद से कई बार देश को संबोधित कर चुके हैं. इस दौरान उन्होंने लोगों को सुझाव दिए और कई बार नई घोषणाएं भी की हैं.

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पंजाब, जेएनएन। कोरोना काल में काढ़ा का अत्यधिक प्रयोग पाचनशक्ति को खराब करने लगा और लोग कोविड के दूसरे लहर में इस आयुर्वेदिक युक्ति से अब पीछा छुड़ाते दिख रहे हैं। By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब वहीं आम आदमी से लेकर समस्त बुद्धिजीवियों में भी यही भ्रांति अभी तक चली आ रही थी कि कोरोना से निबटने में आयुर्वेद की सीमाएं महज काढ़ा तक ही हैं, जबकि आयुर्वेदीय चिकित्सा शास्त्र में कोविड बीमारी में लक्षण के अनुसार इलाज करने की प्रबल संभावनाएं हैं। बीएचयू में रसशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. आनंद चौधरी ने बताया कि आयुर्वेद में आयुष काढ़ा' ही नहीं बल्कि विभिन्न रस औषधियां भी कोविड-19 के इलाज में कारगर हैं।आयुर्वेदीय रस शास्त्र की विधा में अनेक रस रसायन सुखद परिणाम के साथ विकसित किए गए हैं, जो कि इस महामारी से स्वयं को बचाने में काफी अचूक दवाएं हैं।इन औषधियों में स्वर्ण भस्म का योग स्वर्ण मालिनी बसंत, अभ्रक भस्म, प्रवाल भस्म के योग , त्रैलोक्य चिंतामणी रस , जय मंगल रस , त्रिभुवन कीर्ति रस, लक्ष्मी विलास रस आदि प्रमुख हैं। ये सारी दवाइयां श्वांस, बुखार, कफ को दूर करने के साथ ही पाचन और दीपन की क्रियाओं को बढ़ाती है। उन्होंने बताया कि ये औषधियां ऑनलाइन और ऑफलाइन मेडिकल दुकानों पर उपलब्ध रहती हैं। ये सभी रस शास्त्रीय चिकित्सकीय ग्रंथो में काफी विस्तारपूर्वक वर्णित हैं।दरअसल, भारत अनेक प्रतिष्ठित आयुर्वेदिक चिकित्सक इन वर्णित रस-रसायनों के माध्यम से महामारी की लाक्षणिक चिकित्सा कर रोगियों को स्वस्थ करने में सफल भी हो रहे हैं। यही नहीं एलोपैथ भी इस महामारी की लाक्षणिक चिकित्सा ही कर रही है। वहीं, दुनिया के किसी भी शोध संस्थान द्वारा इस महामारी की शत-प्रतिशत प्रभावी औषधि अब तक विकसित नहीं की जा सकी है। प्रोफेसर चौधरी के अनुसार इन रस औषधियों जैसे कि स्वर्ण, अभ्रक, माक्षिक भस्म के ऊपर निरतंर शोध पत्र प्रकाशित होते रहे हैं, जो कि इनकी व्याधि हरण की क्षमता, त्वरित लाभ, स्वास्थ्य सुरक्षा के मानकों पर खरी उतरी है। वहीं इन रस-रसायनों को खरीदते समय कंपनी की प्रमाणिकता को अवश्य परखे।

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कोरोना पाजिटिव आने के उपरांत जो व्यक्ति कोविड पर फतेह हासिल कर लेते हैं, उन्हें आगे भी आक्सीजन दिए जाने संबंधी डाक्टरी सलाह अनुसार आक्सीजन कंसंट्रेटर मुहैया करवाए जाएंगे। By समाजसेवी वनिता कसनिया पंजाब डिप्टी कमिश्नर हरीश नायर ने बताया कि जिले के सिविल अस्पताल फाजिल्का, अबोहर और जलालाबाद में इसके अंतर्गत आक्सीजन बैंक स्थापित किए गए हैं। डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि इस आक्सीजन बैंक को सुचारू ढंग के साथ चलाने के लिए सिविल अस्पतालों में नोडल अफसर भी नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने बताया कि सिविल अस्पताल फाजिल्का में डा. सुधीर पाठक, सिविल अस्पताल अबोहर में डा. गगनदीप सिंह और सिविल अस्पताल जलालाबाद में डा. दविन्दर कुमार इसकी पूरी देख-रेख करेंगे और जरूरतमंद मरीज इन अधिकारियों के साथ संपर्क कर सकते हैं।सिविल सर्जन डा. परमिन्दर कुमार ने बताया कि यह हिदायतें मौजूदा कोरोना पीड़ितों पर लागू नहीं होंगी। उन्होंने कहा कि घर में आक्सीजन कंसंट्रेटर देने की सुविधा डाक्टर की सलाह अनुसार ही दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जिले के आक्सीजन बैंक से ही 5 लीटर या उससे कम मात्रा वाला आक्सीजन कंसंट्रेटर जरूरतमंद व्यक्ति को...