Skip to main content

COVID-19: साबुन या सैनिटाइजर, क्या है बेहतर?COVID-19: स्वास्थ्य अधिकारियों ने COVID-19 महामारी से संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए कई उपाय बताए हैं और इनमें से एक है, व्यक्तिगत स्वच्छता का महत्व. साबुन या अल्कोहल-आधारित सैनिटाइज़र से बार-बार हाथ धोना. क्या आप जानते हैं कि साबुन या हैंड सैनिटाइज़र में कौन बेहतर है?By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब Which one is better Soap or Sanitizer?Which one is better Soap or Sanitizer?COVID-19 के प्रसार को रोकने के लिए, WHO ने कई एहतियाती उपाय बताए हैं, जिनमें हाथों को बार-बार साफ करने के लिए कहा गया है. साबुन और पानी का उपयोग करें, या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइज़र का. अब सवाल उठता है कि साबुन या सैनिटाइजर में क्या बेहतर है? आइये इस लेख के माध्यम से जानते हैं.बार-बार हाथ धोना क्यों ज़रूरी है?सबसे सरल तरीकों में से एक साबुन से हाथ धोना है जो वायरस को मारने में मदद करता है जिसके साथ आप संपर्क में आ सकते हैं. ऐसा कहा जाता है कि विभिन्न सतहों पर जो नियमित रूप से हम हाथों से स्पर्श करते हैं उनमें वायरस काफी लंबे समय तक रह सकते हैं. इसलिए बार-बार हाथ धोना महत्वपूर्ण है.Ads by Jagran.TVसबसे पहले, हम जानेंगे कि साबुन से हाथ धोने से कोरोना वायरस से छुटकारा कैसे मिलता है?हैंड ग्रिम (Hands grim) में कई वायरस और बैक्टीरिया होते हैं. साबुन से हाथ धोने से वायरस और बैक्टीरिया को पूरी तरह से हटाने में मदद मिलती है.पल्ली थोरार्डसन (Palli Thordarson), न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय में रसायन विज्ञान के स्कूल में एक प्रोफेसर आणविक रसायन विज्ञान के नियम के बारे में बताते हैं जो हमें इसको समझने में मदद करेगा.उन्होंने बताया कि वायरस तीन चीजों से बने होते हैं: न्यूक्लिक एसिड जीनोम जैसे डीएनए या आरएनए एक आनुवंशिक पदार्थ, प्रोटीन जो न्यूक्लिक एसिड के साथ फिट होता है और रेपलीकेट होता है होस्ट बॉडी में और लिपिड की एक फैटी बाहरी परत. इसलिए हम कह सकते हैं कि अधिकांश वायरस में तीन प्रमुख बिल्डिंग ब्लॉक्स होते हैं: आरएनए, प्रोटीन और लिपिड. यहां एक बात ध्यान देने वाली है कि ये इन तीनों के बीच में कनेक्शन मजबूत नहीं होता है क्योंकि इनमें कोई कोवालेंट बांड (covalent bond) नहीं होता है जो कि अधिक स्थिर संरचना प्रदान करता है.एक वेल्क्रो (Velcro) की तरह वे एक साथ काम करते हैं और इसलिए इनके वायरल कण को तोड़ना बहुत मुश्किल है. लेकिन साबुन इस कण को तोड़ सकता है और वायरस को घेरने वाली लिपिड परत को भंग करने में मदद करता है. यह वायरस के भीतर कमजोर बांड को भी तोड़ता है और इसलिए हाथ साफ हो जाते हैं.वनिता कासनियां पंजाब कोरोना वायरस का नाम ‘कोरोना’ ही क्यों रखा गया है?साबुन में क्या होता है?साबुन में वसा जैसे (fat-like) यौगिक होते हैं जिन्हें एम्फीफाइल्स (amphiphiles) कहा जाता है, जो लिपिड के समान होते हैं और वायरस की झिल्ली में पाए जाते हैं. जब साबुन इन वसायुक्त पदार्थों के संपर्क में आता है, तो यह उनके साथ जुड़ जाता है और उन्हें वायरस से अलग कर देता है. साथ ही वायरस को त्वचा से अलग करने के लिए मजबूर कर देता है.या हम कह सकते हैं कि साबुन फैटी एसिड के सोडियम या पोटेशियम लवण के मिश्रण होते हैं जो तेल या वसा से एक निश्चित तापमान पर क्षार के साथ पहुंचते हैं और इस प्रक्रिया को saponification के रूप में जाना जाता है.यही कारण है कि यह कम से कम 20 सेकंड के लिए हाथ धोने का सुझाव दिया जाता है क्योंकि वायरस किसी भी माइनसक्यूल क्रिंकल से चिपक सकता है और 20 सेकंड धोने से निकल जाता है.अब हम sanitizer के बारे में अध्ययन करते हैं.सैनिटाइज़र भी प्रभावी होते हैं परन्तु अल्कोहल-आधारित. 60 से 80% अल्कोहल युक्त सैनिटाइज़र को हाथों से वायरस को हटाने के लिए इस्तेमाल करने का सुझाव दिया जाता है. यह भी कहा जाता है कि सैनिटाइज़र में मौजूद अल्कोहल लिपिड के आवरण को घोल देता है और वायरस को निष्क्रिय कर देता है. प्रभावी होने के लिए, सैनिटाइज़र में कम से कम 60% अल्कोहल होना चाहिए. वहीं साबुन का झाग हाथों के पूरे हिस्सों को कवर कर देता है जबकि सैनिटाइज़र का उपयोग करते हुए अल्कोहल हाथों के सभी हिस्सों के संपर्क में नहीं आ पाता है अगर पूरे हाथों में अच्छे से ना लगाया गया हो. इसलिए सैनिटाइज़र को इस्तेमाल करते वक्त हाथों के पूरे हिस्से को सैनिटाइज़र से कवर करने का उचित उपयोग महत्वपूर्ण बताया गया है.साबुन और सैनिटाइज़र: तुलना- हैंड सैनिटाइज़र आसानी से पर्स, जेब इत्यादि में ले जाया जा सकता है. वास्तव में, जब पानी और साबुन तुरंत उपलब्ध नहीं होते हैं, तो हैंड सेनिटाइज़र कीटाणुओं से निपटने के लिए एक अच्छा विकल्प और सुविधाजनक विकल्प है.- यह भी कहा जाता है कि हैंड सैनिटाइज़र नोरोवायरस इत्यादि को छोड़कर कई प्रकार के वायरस के खिलाफ सक्रिय है, लेकिन एक परिपूर्ण रोगनिरोधी (prophylactic) नहीं हैं. कुछ स्टडीज में बताया गया है कि सैनिटाइज़र कुछ प्रकार के जीवाणुओं से रक्षा नहीं कर पाते हैं जबकि साबुन के मामले में ऐसा नहीं है.- हैंड सैनिटाइजर कभी-कभी हैंड सोप की तुलना में अधिक महंगा हो सकता है. अधिकांश डॉक्टरों के अनुसार "हैंड सैनिटाइज़र अधिक सुविधाजनक और अच्छे होते हैं, लेकिन अंत में साबुन और पानी ही बेहतर होते हैं".- CDC के अनुसार, अल्कोहल-आधारित हैंड सैनिटाइज़र कुछ स्थितियों में हाथों पर रोगाणुओं की संख्या को जल्दी से कम कर सकते हैं, लेकिन सभी प्रकार के कीटाणुओं को खत्म करने में सक्षम नहीं होते हैं.- कई अध्ययनों से पता चला है कि जब हाथ स्पष्ट रूप से गंदे या चिकने होते हैं तो हैंड सैनिटाइज़र उतना प्रभावी नहीं होता है.- कुछ अध्ययनों से ये भी पता चला है कि कीटनाशकों और हाथों में मौजूद भारी धातुओं जैसे हानिकारक रसायनों को हैंड सैनिटाइज़र का उपयोग करके हटाया नहीं जा सकता है.- यदि साबुन और पानी उपलब्ध नहीं है, तो कम से कम 60% अल्कोहल वाले सैनिटाइज़र का उपयोग करने की सलाह दी जाती है. यहां तक कि अध्ययनों से पता चला है कि 60-95% के बीच अल्कोहल आधारित सैनिटाइज़र कीटाणुओं को मारने में ज्यादा प्रभावी होते हैं अल्कोहल या गैर-अल्कोहल आधारित सैनिटाइज़र की तुलना में.- CDC के अनुसार हैंड सैनिटाइज़र का उपयोग हाथों की सतहों पर अच्छे से करना चाहिए और इसे तब तक रगड़ें जब तक कि हाथ सूख नहीं जाता है, जबकि साबुन के झाग हाथ के पूरे हिस्सों में आसानी से फैल जाते हैं.- कुछ अध्ययनों के अनुसार कई बार अल्कोहल-आधारित हैंड सैनिटाइज़र के इस्तेमाल करने से अल्कोहल पॉइज़निंग हो सकती है. इथेनॉल आधारित हैंड सैनिटाइज़र सुरक्षित हैं जब निर्देशित रूप में उपयोग किये जाए, लेकिन विषाक्तता का कारण बन सकता है अगर एक से अधिक कौर निगल लिया जाए. लेकिन साबुन के मामले में ऐसा नहीं है.इसलिए, हम कह सकते हैं कि COVID-19 से लड़ने के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखें और बताए गए उपायों को इस्तेमाल करते रहे. WHO के अनुसार, जब हाथ गंदे दिखे तो साबुन और बहते पानी से धोएं. यदि आपके हाथ स्पष्ट रूप से गंदे नहीं हैं, तो अक्सर अल्कोहल-आधारित हैंड रब या साबुन और पानी का उपयोग करके उन्हें साफ करें.बाल वनिता महिला आश्रमवनिता कासनियां पंजाब एपीडेमिक डिजीज एक्ट 1897 क्या है और यह कोरोना वायरस को कैसे रोकेगा?

COVID-19: साबुन या सैनिटाइजर, क्या है बेहतर?

COVID-19: स्वास्थ्य अधिकारियों ने COVID-19 महामारी से संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए कई उपाय बताए हैं और इनमें से एक है, व्यक्तिगत स्वच्छता का महत्व. साबुन या अल्कोहल-आधारित सैनिटाइज़र से बार-बार हाथ धोना. क्या आप जानते हैं कि साबुन या हैंड सैनिटाइज़र में कौन बेहतर है?
 Which one is better Soap or Sanitizer?
Which one is better Soap or Sanitizer?COVID-19 के प्रसार को रोकने के लिए, WHO ने कई एहतियाती उपाय बताए हैं, जिनमें हाथों को बार-बार साफ करने के लिए कहा गया है. साबुन और पानी का उपयोग करें, या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइज़र का. अब सवाल उठता है कि साबुन या सैनिटाइजर में क्या बेहतर है? आइये इस लेख के माध्यम से जानते हैं.

बार-बार हाथ धोना क्यों ज़रूरी है?

सबसे सरल तरीकों में से एक साबुन से हाथ धोना है जो वायरस को मारने में मदद करता है जिसके साथ आप संपर्क में आ सकते हैं. ऐसा कहा जाता है कि विभिन्न सतहों पर जो नियमित रूप से हम हाथों से स्पर्श करते हैं उनमें वायरस काफी लंबे समय तक रह सकते हैं. इसलिए बार-बार हाथ धोना महत्वपूर्ण है.

Ads by Jagran.TVसबसे पहलेहम जानेंगे कि साबुन से हाथ धोने से कोरोना वायरस से छुटकारा कैसे मिलता है?

हैंड ग्रिम (Hands grim) में कई वायरस और बैक्टीरिया होते हैं. साबुन से हाथ धोने से वायरस और बैक्टीरिया को पूरी तरह से हटाने में मदद मिलती है.

उन्होंने बताया कि वायरस तीन चीजों से बने होते हैं: न्यूक्लिक एसिड जीनोम जैसे डीएनए या आरएनए एक आनुवंशिक पदार्थ, प्रोटीन जो न्यूक्लिक एसिड के साथ फिट होता है और रेपलीकेट होता है होस्ट बॉडी में और लिपिड की एक फैटी बाहरी परत. इसलिए हम कह सकते हैं कि अधिकांश वायरस में तीन प्रमुख बिल्डिंग ब्लॉक्स होते हैं: आरएनए, प्रोटीन और लिपिड. यहां एक बात ध्यान देने वाली है कि ये इन तीनों के बीच में कनेक्शन मजबूत नहीं होता है क्योंकि इनमें कोई कोवालेंट बांड (covalent bond) नहीं होता है जो कि अधिक स्थिर संरचना प्रदान करता है.

एक वेल्क्रो (Velcro) की तरह वे एक साथ काम करते हैं और इसलिए इनके  वायरल कण को तोड़ना बहुत मुश्किल है. लेकिन साबुन इस कण को तोड़ सकता है और वायरस को घेरने वाली लिपिड परत को भंग करने में मदद करता है. यह वायरस के भीतर कमजोर बांड को भी तोड़ता है और इसलिए हाथ साफ हो जाते हैं.

वनिता कासनियां पंजाब कोरोना वायरस का नाम ‘कोरोना’ ही क्यों रखा गया है?

साबुन में क्या होता है?

साबुन में वसा जैसे (fat-like) यौगिक होते हैं जिन्हें एम्फीफाइल्स (amphiphiles) कहा जाता है, जो लिपिड के समान होते हैं और वायरस की झिल्ली में पाए जाते हैं. जब साबुन इन वसायुक्त पदार्थों के संपर्क में आता है, तो यह उनके साथ जुड़ जाता है और उन्हें वायरस से अलग कर देता है. साथ ही वायरस को त्वचा से अलग करने के लिए मजबूर कर देता है.

या हम कह सकते हैं कि साबुन फैटी एसिड के सोडियम या पोटेशियम लवण के मिश्रण होते हैं जो तेल या वसा से एक निश्चित तापमान पर क्षार के साथ पहुंचते हैं और इस प्रक्रिया को saponification के रूप में जाना जाता है.

यही कारण है कि यह कम से कम 20 सेकंड के लिए हाथ धोने का सुझाव दिया जाता है क्योंकि वायरस किसी भी माइनसक्यूल क्रिंकल से चिपक सकता है और 20 सेकंड धोने से निकल जाता है.

अब हम sanitizer के बारे में अध्ययन करते हैं.

सैनिटाइज़र भी प्रभावी होते हैं परन्तु अल्कोहल-आधारित. 60 से 80% अल्कोहल युक्त सैनिटाइज़र को हाथों से वायरस को हटाने के लिए इस्तेमाल करने का सुझाव दिया जाता है. यह भी कहा जाता है कि सैनिटाइज़र में मौजूद अल्कोहल लिपिड के आवरण को घोल देता है और वायरस को निष्क्रिय कर देता है. प्रभावी होने के लिए, सैनिटाइज़र में कम से कम 60% अल्कोहल होना चाहिए. वहीं साबुन का झाग हाथों के पूरे हिस्सों को कवर कर देता है जबकि सैनिटाइज़र का उपयोग करते हुए अल्कोहल हाथों के सभी हिस्सों के संपर्क में नहीं आ पाता है अगर पूरे हाथों में अच्छे से ना लगाया गया हो. इसलिए सैनिटाइज़र को इस्तेमाल करते वक्त हाथों के पूरे हिस्से को सैनिटाइज़र से कवर करने का उचित उपयोग महत्वपूर्ण बताया गया है.

साबुन और सैनिटाइज़र: तुलना

- हैंड सैनिटाइज़र आसानी से पर्स, जेब इत्यादि में ले जाया जा सकता है. वास्तव में, जब पानी और साबुन तुरंत उपलब्ध नहीं होते हैं, तो हैंड सेनिटाइज़र कीटाणुओं से निपटने के लिए एक अच्छा विकल्प और सुविधाजनक विकल्प है.

- यह भी कहा जाता है कि हैंड सैनिटाइज़र नोरोवायरस इत्यादि को छोड़कर कई  प्रकार के वायरस के खिलाफ सक्रिय है, लेकिन एक परिपूर्ण रोगनिरोधी (prophylactic) नहीं हैं. कुछ स्टडीज में बताया गया है कि सैनिटाइज़र कुछ प्रकार के जीवाणुओं से रक्षा नहीं कर पाते  हैं जबकि साबुन के मामले में ऐसा नहीं है.

- हैंड सैनिटाइजर कभी-कभी हैंड सोप की तुलना में अधिक महंगा हो सकता है. अधिकांश डॉक्टरों के अनुसार "हैंड सैनिटाइज़र अधिक सुविधाजनक और अच्छे होते हैं, लेकिन अंत में साबुन और पानी ही बेहतर होते हैं".

- CDC के अनुसार, अल्कोहल-आधारित हैंड सैनिटाइज़र कुछ स्थितियों में हाथों पर रोगाणुओं की संख्या को जल्दी से कम कर सकते हैं, लेकिन सभी प्रकार के कीटाणुओं को खत्म करने में सक्षम नहीं होते हैं.

- कई अध्ययनों से पता चला है कि जब हाथ स्पष्ट रूप से गंदे या चिकने होते हैं तो हैंड सैनिटाइज़र उतना प्रभावी नहीं होता है.

- कुछ अध्ययनों से ये भी पता चला है कि कीटनाशकों और हाथों में मौजूद भारी धातुओं जैसे हानिकारक रसायनों को हैंड सैनिटाइज़र का उपयोग करके हटाया नहीं जा सकता है.

- यदि साबुन और पानी उपलब्ध नहीं है, तो कम से कम 60% अल्कोहल वाले सैनिटाइज़र का उपयोग करने की सलाह दी जाती है. यहां तक कि अध्ययनों से पता चला है कि 60-95% के बीच अल्कोहल आधारित सैनिटाइज़र कीटाणुओं को मारने में ज्यादा प्रभावी होते हैं अल्कोहल या गैर-अल्कोहल आधारित सैनिटाइज़र की तुलना में.

- CDC के अनुसार हैंड सैनिटाइज़र का उपयोग हाथों की सतहों पर अच्छे से करना चाहिए और इसे तब तक रगड़ें जब तक कि हाथ सूख नहीं जाता है, जबकि साबुन के झाग हाथ के पूरे हिस्सों में आसानी से फैल जाते हैं.

- कुछ अध्ययनों के अनुसार कई बार अल्कोहल-आधारित हैंड सैनिटाइज़र के इस्तेमाल करने से अल्कोहल पॉइज़निंग हो सकती है. इथेनॉल आधारित हैंड सैनिटाइज़र सुरक्षित हैं जब निर्देशित रूप में उपयोग किये जाए, लेकिन विषाक्तता का कारण बन सकता है अगर एक से अधिक कौर निगल लिया जाए. लेकिन साबुन के मामले में ऐसा नहीं है.

इसलिए, हम कह सकते हैं कि COVID-19 से लड़ने के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखें और बताए गए उपायों को इस्तेमाल करते रहे. WHO के अनुसार, जब हाथ गंदे दिखे तो साबुन और बहते पानी से धोएं. यदि आपके हाथ स्पष्ट रूप से गंदे नहीं हैं, तो अक्सर अल्कोहल-आधारित हैंड रब या साबुन और पानी का उपयोग करके उन्हें साफ करें.

बाल वनिता महिला आश्रम

वनिता कासनियां पंजाब एपीडेमिक डिजीज एक्ट 1897 क्या है और यह कोरोना वायरस को कैसे रोकेगा?

Comments

Popular posts from this blog

प्रत्येक इंसान चाहता है कि उसका शरीर ताकतवर रहे, स्वस्थ रहें । अधिकतर पुरुषों में कमजोरी का प्रभाव देखने को मिलता है जिसका कारण है उनका गलत खानपान । आज हम आपको उन तीन चीजों के बारे में बताने वाले हैं जिनका यदि लगातार सेवन किया जाए तो 1 महीने से भी कम समय में शरीर बलवान बन जाएगा । Vnita punjab आंवला –आंवला में विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इन्फ्लेमेटरी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं । जो पुरुषों को दीर्घायु प्रदान करते हैं । आंवला खाने से बाल काले, लंबे एवं घने होते हैं । त्वचा जवान दिखती है, स्कीन का रंग साफ होता है । आंवले का मुरब्बा या आचार इस्तेमाल कर सकते हैं । Vnita Kasnia खजूर –खजूर में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन के, विटामिन ए, कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं । जो शरीर को मजबूत और ताकतवर बनाते हैं । सुबह के नाश्ते में दूध के साथ खजूर का सेवन करने से मांसपेशियों का विकास होता है और शरीर में ताकत आती है Vnita punjab किशमिश –किशमिश में कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम, आयरन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो मजबूत शरीर बनाने के लिए पर्याप्त है । किशमिश का सेवन लगातार करने से कब्ज की समस्या दूर होती है और स्टेमिना बढ़ाती है ।https://www.facebook.com/%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%B5%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%86%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AE-101621781784017/

🙏: आंवला –आंवला में विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इन्फ्लेमेटरी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं । जो पुरुषों को दीर्घायु प्रदान करते हैं । आंवला खाने से बाल काले, लंबे एवं घने होते हैं । त्वचा जवान दिखती है, स्कीन का रंग साफ होता है । आंवले का मुरब्बा या आचार इस्तेमाल कर सकते हैं । Vnita Kasnia खजूर –खजूर में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन के, विटामिन ए, कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं । जो शरीर को मजबूत और ताकतवर बनाते हैं । सुबह के नाश्ते में दूध के साथ खजूर का सेवन करने से मांसपेशियों का विकास होता है और शरीर में ताकत आती है Vnita punjab किशमिश –किशमिश में कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम, आयरन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो मजबूत शरीर बनाने के लिए पर्याप्त है । किशमिश का सेवन लगातार करने से कब्ज की समस्या दूर होती है और स्टेमिना बढ़ाती है ।,

राजस्थान की ब्रेकिंग- कोविड के नए वेरियंट के नए लक्षण*बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम की अध्यक्ष श्रीमती वनिता कासनियां पंजाब* आपातकाल मीटिंग में हुए महत्वपूर्ण निर्णय, मुख्यमंत्री ने ली कैबिनेट की मीटिंग, चिकित्सा और स्वास्थ्य मंत्री रहे मौजूद। - प्रदेश में किसी भी प्रकार के धरना प्रदर्शन आगामी आदेश तक पूर्णतः प्रतिबंधित रहेंगे। किसी भी प्रकार के धरना प्रदर्शन की इजाज़त फिलहाल नही दी जाएगी। - कल से 50% क्षमता के साथ स्कूल खुलेंगे,6 दिन में से 3 दिन बच्चे स्कूल में पढ़ने जाएंगे। - स्कूलों और कॉलेजों की ऑनलाइन कक्षाएं फिर से शूरू कर रहे हैं।- बिना मास्क वालों पर चालानी कार्यवाही होगी, रोको-तोको अभियान फिर से शुरु किया जायेगा। - निजी संस्थानों में वैक्सीन के दोनों डोज लगे होने पर ही प्रवेश मिलेगा। - समस्त कार्यालय नई गाइडलाइन आने तक 100 प्रतिशत क्षमता के साथ खुले रहेंगे। - शादियों में अधिकतम दोनों पक्षो को मिलाकर कुल 200 लोग रहेंगे मौजूद।कोरोना के नए वेरिएंट को लेकर प्रदेश सरकार का बड़ा फैसलासीएम अशोक गलोत का बयानस्कूल 100 फीसद तादाद की जगह 50% तादाद के साथ ही संचालित होंगेस्कूल ऑन लाईन क्लास बंद नहीं करेंगे, ऑन लाईन क्लास जारी रहेंगीकल से लागू होगी नई व्यवस्था *नए वेरिएंट B.1.1.1.529 को OMICRON नाम दिया गया है,*----------------------------वायरस वापस आ गया है, इस बार अधिक ऊर्जा, रणनीति और छलावरण के साथ।इस बार हमें खांसी नहीं होगी, बुखार नहीं होगा, जोड़ों का दर्द नहीं होगा, बस कमजोरी होगी,भूख न लगना और कोविड निमोनिया होगा!बेशक, मृत्यु दर अधिक है, चरम पर पहुंचने में कम समय लगता है। कभी-कभी कोई लक्षण नहीं... आइए सावधान रहें...यह सीधे फेफड़ों को प्रभावित करता है, जिसका अर्थ है कि अवधि कम हो जाती है।बहुत से रोगियों को बिना बुखार के देखा है, लेकिन एक एक्स-रे रिपोर्ट में मध्यम छाती का निमोनिया दिखाई देता है!COVID19 के लिए अक्सर नेज़ल स्वैब नकारात्मक होता है!वायरस सीधे फेफड़ों में फैलता है जिससे वायरल निमोनिया के कारण तीव्र श्वसन संकट होता है! यह बताता है कि यह तीव्र और अधिक घातक क्यों हो गया है !!!सावधान रहें, भीड़-भाड़ वाली जगहों से बचें, फेस मास्क पहनें, बार-बार हाथ धोएं।*लहरें* पहले से ज्यादा घातक। इसलिए हमें बहुत सावधान रहना होगा और *हर सावधानी बरतनी होगी।* --------------------------इस जानकारी को अपने पास न रखें, इसे अपने परिवार और दोस्तों के साथ साझा करें।कृपया ध्यान रखें और सुरक्षित रहें!

राजस्थान की ब्रेकिंग- कोविड के नए वेरियंट के नए लक्षण *बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम की अध्यक्ष श्रीमती वनिता कासनियां पंजाब*  आपातकाल मीटिंग में हुए महत्वपूर्ण निर्णय, मुख्यमंत्री ने ली कैबिनेट की मीटिंग, चिकित्सा और स्वास्थ्य मंत्री रहे मौजूद।  - प्रदेश में किसी भी प्रकार के धरना प्रदर्शन आगामी आदेश तक पूर्णतः प्रतिबंधित रहेंगे। किसी भी प्रकार के धरना प्रदर्शन की इजाज़त फिलहाल नही दी जाएगी।  - कल से 50% क्षमता के साथ स्कूल खुलेंगे,6 दिन में से 3 दिन बच्चे स्कूल में पढ़ने जाएंगे।  - स्कूलों और कॉलेजों की ऑनलाइन कक्षाएं फिर से शूरू कर रहे हैं। - बिना मास्क वालों पर चालानी कार्यवाही होगी, रोको-तोको अभियान फिर से शुरु किया जायेगा।  - निजी संस्थानों में वैक्सीन के दोनों डोज लगे होने पर ही प्रवेश मिलेगा।  - समस्त कार्यालय नई गाइडलाइन आने तक 100 प्रतिशत क्षमता के साथ खुले रहेंगे।  - शादियों में अधिकतम दोनों पक्षो को मिलाकर कुल 200 लोग रहेंगे मौजूद। कोरोना के नए वेरिएंट को लेकर प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला सीएम अशोक गलोत का बयान स्कूल 100 फीसद तादाद की जगह 50% त...

बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम

Green Fungus: कोरोना से रिकवर हो रहे मरीजों पर ग्रीन फंगस का खतरा, जानें इसके लक्षण By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब T 1/10 कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने देश में कई समस्याएं खड़ी की हैं. इस बीच देश में ब्लैक फंगस, व्हाइट और येलो फंगस जैसे कई फंगल इंफेक्शन के केस सामने आ चुके हैं. लोग अब तक इन फंगल इंफेक्शन से उभर नहीं पाए हैं कि देश में पहली बार ग्रीन फंगस ने भी दस्तक दे दी है. Photo credit- pixabay 2/10 रिपोर्ट्स के अनुसार, मध्य प्रदेश के इंदौर में एक 34 वर्षिय कोविड- 19 से रिकवर हुए मरीज में ग्रीन फंगस इंफेक्शन का केस सामने आया है. एक वरिष्ठ चिकित्सक ने बताया कि मरीज में ग्रीन फंगस इंफेक्शन का पता लगने के तुरंत बाद उसे इलाज के लिए एयर एम्बुलेंस द्वारा मुंबई शिफ्ट किया गया है. Photo credit- pixabay 3/10 श्री अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SAIMS) के चेस्ट रोग विभाग के प्रमुख डॉ रवि डोसी के मुताबिक, कोविड-19 से ठीक हुए व्यक्ति पर इसका परीक्षण किया गया था कि क्या उसमें ब्लैक फंगस (म्यूकोर्मिकोसिस) के संक्रमण का खतरा हो सकता है. इस परीक्षण के बाद मरीज में ब्लैक फंगस...