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After coming to Corona positive, those who gain victory over Kovid will also be provided with oxygen concentrator according to the doctor's advice on providing oxygen.By philanthropist Vanita Kasaniya Panj

कोरोना पाजिटिव आने के उपरांत जो व्यक्ति कोविड पर फतेह हासिल कर लेते हैं, उन्हें आगे भी आक्सीजन दिए जाने संबंधी डाक्टरी सलाह अनुसार आक्सीजन कंसंट्रेटर मुहैया करवाए जाएंगे।
By समाजसेवी वनिता कसनिया पंजाब

डिप्टी कमिश्नर हरीश नायर ने बताया कि जिले के सिविल अस्पताल फाजिल्का, अबोहर और जलालाबाद में इसके अंतर्गत आक्सीजन बैंक स्थापित किए गए हैं। डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि इस आक्सीजन बैंक को सुचारू ढंग के साथ चलाने के लिए सिविल अस्पतालों में नोडल अफसर भी नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने बताया कि सिविल अस्पताल फाजिल्का में डा. सुधीर पाठक, सिविल अस्पताल अबोहर में डा. गगनदीप सिंह और सिविल अस्पताल जलालाबाद में डा. दविन्दर कुमार इसकी पूरी देख-रेख करेंगे और जरूरतमंद मरीज इन अधिकारियों के साथ संपर्क कर सकते हैं।सिविल सर्जन डा. परमिन्दर कुमार ने बताया कि यह हिदायतें मौजूदा कोरोना पीड़ितों पर लागू नहीं होंगी। उन्होंने कहा कि घर में आक्सीजन कंसंट्रेटर देने की सुविधा डाक्टर की सलाह अनुसार ही दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जिले के आक्सीजन बैंक से ही 5 लीटर या उससे कम मात्रा वाला आक्सीजन कंसंट्रेटर जरूरतमंद व्यक्ति को मुहैया करवाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आक्सीजन कंसंट्रेटर लेने वाले व्यक्ति को इस संबंधी अपना स्व-घोषणा पत्र देना जरूरी होगा। सिविल सर्जन ने कहा कि व्यक्ति को इलाज मुकम्मल होने पर आक्सीजन कंसंट्रेटर वापिस करना जरूरी होगा। उन्होंने कहा कि सिक्युरिटी के तौर पर पीला कार्ड, नीला कार्ड, आयुष्मान या निर्माण मजदूर कार्ड वाले व्यक्तियों को पांच हजार रुपये और अन्य कैटागरी के साथ संबंधित व्यक्तियों को 10 हजार रुपए जमा करवाने पड़ेंगे। आक्सीजन कंसंट्रेटर वापिस करने पर उनको पैसे वापस मिल जाएंगे।

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पाइथागोरस कप या "लालची कप" क्या है? By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब पाइथागोरस नहीं चाहते थे कि उनके छात्र ज्यादा पिएं। इसीलिए उन्होंने "लालची कप" यानी "पाइथागोरस कप" का निर्माण किया। इसे पाइथागोरस कप कहते है इसके अंदर यह अजीब-सा उभरा हुआ भाग होता है। पाइथागोरस ने खुद इस कप की रचना की थी। (वही पाइथागोरस जिन्होंने समकोण त्रिकोण का अध्ययन किया था) उन्होंने यह कप इसलिए बनाया ताकि उनके सभी छात्र नियंत्रित मात्रा में मद्यपान करें और बेकाबू छात्रों को अपने आप सजा मिल जाये। जैसे ही कोई लालची छात्र ज्यादा मदिरा लेने का प्रयास करता था तो यह कप एक बार में ही पूरा खाली हो जाता था। आइए जानते हैं कि ये कैसे काम करता है:- कप के अंदर एक पलटा हुआ यू-ट्यूब है (पलटी हुई आकर की नली / साइफन) जिसके नीचे एक छोटा छेद है कप के साथ ही यू-ट्यूब में भी पानी भरता जाता है और ऊपर पहुँचते ही, साइफन की क्रिया से सारा पानी बह जाता है। मदिरा का स्तर जब इस बीच वाली नली से ऊपर हो जाता है तब पूरी मदिरा कप के नीचे वाले छेद से बह जाती है। साइफन की क्रिया हम सब में से अधिकतर लोगों ने देखी ही होग...