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क्यों आया कोरोना दुबारा और कब तक रहेगा कोरोना ?By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब2020 के शुरू में कोरोना की शुरुआत हुई थी । तब मैंने शनि के मकर राशि में प्रवेश की वजह से होने वाले परिणामों के बारे में न सिर्फ अपनी वेबसाइट पर लिखा था बल्कि कोरा पर भी लिखा था और यह अभी भी मेरी साइट ब्लॉगर covid 19 पर अंग्रेजी में मौजूद है ।मूलतः शनि मकर राशि में आने पर जनता को किसी न किसी तरह से त्रस्त रखता है। कारण आंतरिक अशांति , गृहयुद्ध, सूखा, बाढ़, भूकम्प , टिड्डी आदि कीटों से फसलों की हानि और उससे जनित अकाल , महामारी आदि कुछ भी हो सकता है और यह विश्वव्यापी होता है ।शनि मकर या किसी भी राशि में करीब 30 महीने रहता है और हर 30 साल बाद आता है । अभी यह 24 जनवरी 2020 से आया है और 29 अप्रैल 2022 तक रहेगा । इससे पहले यह 1990 से 1993 में आया था और उससे भी पहले 1961–63 में आया था .याद करें 1990–1993 में क्या क्या हुआ था ।उन दिनों देश में ढीली ढाली गठबंधन सरकार थी और आर्थिक स्थिति अब के पाकिस्तान जैसी थी । 1991 में देश को सोना गिरवी रखकर आयात करना पड़ा था । मई 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद बनी नरसिम्हाराव की सरकार को देश में आर्थिक उदारीकरण करना पड़ा क्योंकि देश की आर्थिक स्थिति पूरी तरह तबाह थी । इसी दौरान आडवाणी की रथयात्रा , मंडल कमीशन , हिन्दू मुस्लिम दंगे , 6 दिसम्बर 1992 की अराजकता और उसके बदले में 1993 के मुम्बई बम्ब ब्लास्ट के अलावा आरक्षण समर्थक और विरोधी आंदोलन भी इसी दौर में हुए थे ।भारत से बाहर अमेरिका , इराक -कुवैत का युद्ध , तेल की बढ़ी कीमतें इसी दौर में हुईं थीं ।इससे पहले 1961–1963 में देश ने चीन का आक्रमण देखा । देश में अकाल की स्थिति भी इस दौर में थी । क्यूबा का मिसाइल संकट ,सोवियत संघ -अमेरिका का तनाव भी इसी कालखंड में था ।इससे पहले 1931–33 में विश्वव्यापी मंदी चल रही थी ।सिर्फ शनि मकर राशि में हो तो यह फल होते ही हैं इसलिए 2020–22 के लिए भी मैंने इन्हीं परिणामों की सम्भावना 2019 के अंत होते समय लिखी थी ।2020 के आरंभ होते होते कोरोना महामारी की शुरुआत हो गयी थी । मेरे पास अनेक फोन आने शुरू हो गए थे कि यह कब तक रहेगी । बार बार उत्तर देने की जगह मैंने अपने पहले पेज पर इसका टाइम टेबल लगा दिया था जो अभी भी मौजूद है ।अब तक के शनि के मकर राशि में गोचर के परिणाम हम शाहीन बाग़, किसान आंदोलन ,गलवां में चीनी आक्रमण , टिड्डी दल के आगमन , अर्थव्यवस्था की दुर्गति, कोरोना महामारी , किसान आंदोलन के रूप में देख चुके हैं ।मोदी सरकार जब भी किसी आंदोलन में फंसती है भगवान दूसरी विपदा भेज कर उसे उबार लेती है ☺️☺️☺️इस बार का कोरोना किसान आंदोलन से मुक्ति देगा , पिछली बार शाहीन बाग से मिली थी।लेकिन इस बार शनि मकर राशि में 1990–93 की तरह अकेला नहीं था । वहां गुरु बृहस्पति भी अप्रैल 2020 से आ जा रहे थे ।यहां पर ध्यान देने की बात यह है कि जब भी गुरु किसी ग्रह के समीप आता है उसी राशि में तो पाप ग्रह अपने दुष्प्रभाव कम कर देता है और जब वह गुरु से दूर चला जाता है तो उसके दुष्प्रभाव बढ़ जाते हैं ।2020 और 2021 में निम्न समयांतराल में गुरु शनि के नज़दीक और दूर , वक्री और मार्गी होने से होता रहा या होता रहेगा ।30 मार्च 2020 से गुरु ने मकर राशि में प्रवेश किया और मार्गी गति से 15 मई 2020 तक शनि से सिर्फ 3 अंश की दूरी पर था । इस समय ज्यादातर देश लाक डाउन में थे और देश में कोरोना नियंत्रण में था ।15 मई 2020 से गुरु वक्री (उल्टी) गति से चलना शुरू किया और शनि से दूर हटने लगा । ऐसा 4 महीने तक चला और यह हर साल चार महीने वक्री रहता है । और एक जुलाई 2020 को गुरु वक्री गति से मकर राशि को छोड़कर वापस धनु राशि में आ गया । 15 मई 2020 से देश भर में महानगरों से लोग पैदल चल कर गांव पहुंचने लगे जो जून अंत तक चला और फिर जुलाई से सितंबर तक जब शनि मकर राशि में अकेला और वक्री था , तब देश में कोरोना की वजह से सबसे ज्यादा लोग बीमार हुए ।सितंबर 2020 के अंत में गुरु जो केतु के साथ वक्री था , पुनः सीधी चाल से चलकर शनि की तरफ बढ़ना आरम्भ हुआ । इसी समय केतु भी गुरु को धनु में छोड़कर वृश्चिक राशि में गया । इन दोनों कारणों से कोरोना की स्थिति में अक्टूबर 2020 से सुधार चालू हुआ । 20 नवम्बर को यह पुनः शनि की राशि में प्रविष्ट हुआ और 20 दिसम्बर 2020 को शनि के अंश तक पहुंच गया । इसी समय कोरोना के नए वैरिएंट की ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका में खोज हुई जो बड़ी तेजी से फैल रहा था । गुरु के शनि के करीब होने से इसी समय विश्वभर में वैक्सीन के सफल परीक्षणों की घोषणा हुई और अमेरिका व अन्य देशों में वैक्सीन लगाने की शुरुआत हुई ।दिसम्बर 2020 के बाद से गुरु लगातार मकर राशि में शनि से दूर जा रहा था । तदनुसार दुनियां में कोरोना के नए वैरिएंट का फैलाव बढ़ने लगा था । अमेरिका, ब्रिटेन में बर्फबारी के मौसम में सबसे ज्यादा मौतें जनवरी में हो रहीं थीं । भारत में भी नया वैरिएंट पैर फैला रहा था लेकिन लोग निश्चिंत थे , सरकार ने टेस्टिंग और सतर्कता घटा दी थी , वैक्सीन आने की घोषणा से लोग अति निश्चिन्त हो गए, शादी बरात , घूमना , फिरना , शॉपिंग सब पहले जैसा हो गया। लोकल , मेट्रो , उड़ाने सब पहले की तरह चल रहा था जैसे कोरोना समाप्त हो गया हो । नतीजा यह हुआ कि नए वैरिएंट जो ज्यादा तेजी से फैल रहा था , उसको फैलने का पूरा मौका मिल गया ।नीचे 22 फरवरी 2021 के बैंगलोर का फोरम मॉल का एक कन्नड़ फ़िल्म के प्रोमोशन से जुड़ा चित्र है । इसमें ज्यादातर लोग बिना मास्क के एक दूसरे से चिपके खड़े हैं । यह चित्र मैंने खुद लिया था और लोगों को इस कमेंट के साथ भेजा था कि अब कोरोना फिर फैलेगा ।शनि से गुरु लगातार दूर हो रहा था और 6 अप्रैल 2021 को यह मकर राशि में शनि को अकेला छोड़कर कुम्भ राशि में प्रवेश कर गया ।अब शनि गुरु के नियंत्रण से सर्वथा मुक्त है , ठीक वैसे ही जैसे जुलाई 2020 से नवम्बर 2020 तक था । यह समय सबसे ज्यादा कोरोना से त्रस्त करेगा ।बाल वनिता महिला आश्रमकब कम होगा कोरोना ??15–20 जून के आसपास गुरु पुनः 4 महीने के लिए वक्री होगा और वह धीमी गति से शनि की ओर बढ़ेगा तो शनि पर कुछ नियंत्रण आएगा और कोरोना की मारक क्षमता कम होने लगेगी । सितंबर से नवम्बर तक यह पुनः शनि के साथ होगा तो उस समय तक कोरोना पर कुछ हद तक फिर नियंत्रण होगा ।20 नवम्बर 2021 से गुरु फिर से कुम्भ राशि में रहेगा तो अप्रैल 2022 तक कोरोना की तीसरी लहर का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा । लेकिन तीसरी लहर कमजोर होगी और लोग काफी हद तक वैक्सीनेटेड हो चुके होंगे तो इसका असर दूसरी लहर से कम होगा । उसके बाद कोरोना का मारक महत्व समाप्त हो जाएगा ।इसमें एक सहायक कारण केतु का वृश्चिक राशि और राहु का वृष राशि में होना भी है , जो भारत की लग्न पर गोचर है ।इसलिए भारत पर दूसरी कोरोना लहर का अप्रैल से अक्टूबर में ज्यादा असर होगा । यह गोचर भी अप्रैल 2022 में ही समाप्त होगा ।

2020 के शुरू में कोरोना की शुरुआत हुई थी । तब मैंने शनि के मकर राशि में प्रवेश की वजह से होने वाले परिणामों के बारे में न सिर्फ अपनी वेबसाइट पर लिखा था बल्कि कोरा पर भी लिखा था और यह अभी भी मेरी साइट ब्लॉगर covid 19 पर अंग्रेजी में मौजूद है ।

मूलतः शनि मकर राशि में आने पर जनता को किसी न किसी तरह से त्रस्त रखता है। कारण आंतरिक अशांति , गृहयुद्ध, सूखा, बाढ़, भूकम्प , टिड्डी आदि कीटों से फसलों की हानि और उससे जनित अकाल , महामारी आदि कुछ भी हो सकता है और यह विश्वव्यापी होता है ।


शनि मकर या किसी भी राशि में करीब 30 महीने रहता है और हर 30 साल बाद आता है । अभी यह 24 जनवरी 2020 से आया है और 29 अप्रैल 2022 तक रहेगा । इससे पहले यह 1990 से 1993 में आया था और उससे भी पहले 1961–63 में आया था .

याद करें 1990–1993 में क्या क्या हुआ था ।

उन दिनों देश में ढीली ढाली गठबंधन सरकार थी और आर्थिक स्थिति अब के पाकिस्तान जैसी थी । 1991 में देश को सोना गिरवी रखकर आयात करना पड़ा था । मई 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद बनी नरसिम्हाराव की सरकार को देश में आर्थिक उदारीकरण करना पड़ा क्योंकि देश की आर्थिक स्थिति पूरी तरह तबाह थी । इसी दौरान आडवाणी की रथयात्रा , मंडल कमीशन , हिन्दू मुस्लिम दंगे , 6 दिसम्बर 1992 की अराजकता और उसके बदले में 1993 के मुम्बई बम्ब ब्लास्ट के अलावा आरक्षण समर्थक और विरोधी आंदोलन भी इसी दौर में हुए थे ।

भारत से बाहर अमेरिका , इराक -कुवैत का युद्ध , तेल की बढ़ी कीमतें इसी दौर में हुईं थीं ।

इससे पहले 1961–1963 में देश ने चीन का आक्रमण देखा । देश में अकाल की स्थिति भी इस दौर में थी । क्यूबा का मिसाइल संकट ,सोवियत संघ -अमेरिका का तनाव भी इसी कालखंड में था ।

इससे पहले 1931–33 में विश्वव्यापी मंदी चल रही थी ।


सिर्फ शनि मकर राशि में हो तो यह फल होते ही हैं इसलिए 2020–22 के लिए भी मैंने इन्हीं परिणामों की सम्भावना 2019 के अंत होते समय लिखी थी ।

2020 के आरंभ होते होते कोरोना महामारी की शुरुआत हो गयी थी । मेरे पास अनेक फोन आने शुरू हो गए थे कि यह कब तक रहेगी । बार बार उत्तर देने की जगह मैंने अपने पहले पेज पर इसका टाइम टेबल लगा दिया था जो अभी भी मौजूद है ।

अब तक के शनि के मकर राशि में गोचर के परिणाम हम शाहीन बाग़, किसान आंदोलन ,गलवां में चीनी आक्रमण , टिड्डी दल के आगमन , अर्थव्यवस्था की दुर्गति, कोरोना महामारी , किसान आंदोलन के रूप में देख चुके हैं ।

मोदी सरकार जब भी किसी आंदोलन में फंसती है भगवान दूसरी विपदा भेज कर उसे उबार लेती है ☺️☺️☺️

इस बार का कोरोना किसान आंदोलन से मुक्ति देगा , पिछली बार शाहीन बाग से मिली थी।


लेकिन इस बार शनि मकर राशि में 1990–93 की तरह अकेला नहीं था । वहां गुरु बृहस्पति भी अप्रैल 2020 से आ जा रहे थे ।

यहां पर ध्यान देने की बात यह है कि जब भी गुरु किसी ग्रह के समीप आता है उसी राशि में तो पाप ग्रह अपने दुष्प्रभाव कम कर देता है और जब वह गुरु से दूर चला जाता है तो उसके दुष्प्रभाव बढ़ जाते हैं ।

2020 और 2021 में निम्न समयांतराल में गुरु शनि के नज़दीक और दूर , वक्री और मार्गी होने से होता रहा या होता रहेगा ।

  • 30 मार्च 2020 से गुरु ने मकर राशि में प्रवेश किया और मार्गी गति से 15 मई 2020 तक शनि से सिर्फ 3 अंश की दूरी पर था । इस समय ज्यादातर देश लाक डाउन में थे और देश में कोरोना नियंत्रण में था ।
  • 15 मई 2020 से गुरु वक्री (उल्टी) गति से चलना शुरू किया और शनि से दूर हटने लगा । ऐसा 4 महीने तक चला और यह हर साल चार महीने वक्री रहता है । और एक जुलाई 2020 को गुरु वक्री गति से मकर राशि को छोड़कर वापस धनु राशि में आ गया । 15 मई 2020 से देश भर में महानगरों से लोग पैदल चल कर गांव पहुंचने लगे जो जून अंत तक चला और फिर जुलाई से सितंबर तक जब शनि मकर राशि में अकेला और वक्री था , तब देश में कोरोना की वजह से सबसे ज्यादा लोग बीमार हुए ।
  • सितंबर 2020 के अंत में गुरु जो केतु के साथ वक्री था , पुनः सीधी चाल से चलकर शनि की तरफ बढ़ना आरम्भ हुआ । इसी समय केतु भी गुरु को धनु में छोड़कर वृश्चिक राशि में गया । इन दोनों कारणों से कोरोना की स्थिति में अक्टूबर 2020 से सुधार चालू हुआ । 20 नवम्बर को यह पुनः शनि की राशि में प्रविष्ट हुआ और 20 दिसम्बर 2020 को शनि के अंश तक पहुंच गया । इसी समय कोरोना के नए वैरिएंट की ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका में खोज हुई जो बड़ी तेजी से फैल रहा था । गुरु के शनि के करीब होने से इसी समय विश्वभर में वैक्सीन के सफल परीक्षणों की घोषणा हुई और अमेरिका व अन्य देशों में वैक्सीन लगाने की शुरुआत हुई ।
  • दिसम्बर 2020 के बाद से गुरु लगातार मकर राशि में शनि से दूर जा रहा था । तदनुसार दुनियां में कोरोना के नए वैरिएंट का फैलाव बढ़ने लगा था । अमेरिका, ब्रिटेन में बर्फबारी के मौसम में सबसे ज्यादा मौतें जनवरी में हो रहीं थीं । भारत में भी नया वैरिएंट पैर फैला रहा था लेकिन लोग निश्चिंत थे , सरकार ने टेस्टिंग और सतर्कता घटा दी थी , वैक्सीन आने की घोषणा से लोग अति निश्चिन्त हो गए, शादी बरात , घूमना , फिरना , शॉपिंग सब पहले जैसा हो गया। लोकल , मेट्रो , उड़ाने सब पहले की तरह चल रहा था जैसे कोरोना समाप्त हो गया हो । नतीजा यह हुआ कि नए वैरिएंट जो ज्यादा तेजी से फैल रहा था , उसको फैलने का पूरा मौका मिल गया ।
  • नीचे 22 फरवरी 2021 के बैंगलोर का फोरम मॉल का एक कन्नड़ फ़िल्म के प्रोमोशन से जुड़ा चित्र है । इसमें ज्यादातर लोग बिना मास्क के एक दूसरे से चिपके खड़े हैं । यह चित्र मैंने खुद लिया था और लोगों को इस कमेंट के साथ भेजा था कि अब कोरोना फिर फैलेगा ।
  • शनि से गुरु लगातार दूर हो रहा था और 6 अप्रैल 2021 को यह मकर राशि में शनि को अकेला छोड़कर कुम्भ राशि में प्रवेश कर गया ।
  • अब शनि गुरु के नियंत्रण से सर्वथा मुक्त है , ठीक वैसे ही जैसे जुलाई 2020 से नवम्बर 2020 तक था । यह समय सबसे ज्यादा कोरोना से त्रस्त करेगा ।
  • बाल वनिता महिला आश्रम

कब कम होगा कोरोना ??

15–20 जून के आसपास गुरु पुनः 4 महीने के लिए वक्री होगा और वह धीमी गति से शनि की ओर बढ़ेगा तो शनि पर कुछ नियंत्रण आएगा और कोरोना की मारक क्षमता कम होने लगेगी । सितंबर से नवम्बर तक यह पुनः शनि के साथ होगा तो उस समय तक कोरोना पर कुछ हद तक फिर नियंत्रण होगा ।

20 नवम्बर 2021 से गुरु फिर से कुम्भ राशि में रहेगा तो अप्रैल 2022 तक कोरोना की तीसरी लहर का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा । लेकिन तीसरी लहर कमजोर होगी और लोग काफी हद तक वैक्सीनेटेड हो चुके होंगे तो इसका असर दूसरी लहर से कम होगा । उसके बाद कोरोना का मारक महत्व समाप्त हो जाएगा ।

इसमें एक सहायक कारण केतु का वृश्चिक राशि और राहु का वृष राशि में होना भी है , जो भारत की लग्न पर गोचर है ।इसलिए भारत पर दूसरी कोरोना लहर का अप्रैल से अक्टूबर में ज्यादा असर होगा । यह गोचर भी अप्रैल 2022 में ही समाप्त होगा ।

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