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पंजाब, जेएनएन। कोरोना काल में काढ़ा का अत्यधिक प्रयोग पाचनशक्ति को खराब करने लगा और लोग कोविड के दूसरे लहर में इस आयुर्वेदिक युक्ति से अब पीछा छुड़ाते दिख रहे हैं। By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब वहीं आम आदमी से लेकर समस्त बुद्धिजीवियों में भी यही भ्रांति अभी तक चली आ रही थी कि कोरोना से निबटने में आयुर्वेद की सीमाएं महज काढ़ा तक ही हैं, जबकि आयुर्वेदीय चिकित्सा शास्त्र में कोविड बीमारी में लक्षण के अनुसार इलाज करने की प्रबल संभावनाएं हैं। बीएचयू में रसशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. आनंद चौधरी ने बताया कि आयुर्वेद में आयुष काढ़ा' ही नहीं बल्कि विभिन्न रस औषधियां भी कोविड-19 के इलाज में कारगर हैं।आयुर्वेदीय रस शास्त्र की विधा में अनेक रस रसायन सुखद परिणाम के साथ विकसित किए गए हैं, जो कि इस महामारी से स्वयं को बचाने में काफी अचूक दवाएं हैं।इन औषधियों में स्वर्ण भस्म का योग स्वर्ण मालिनी बसंत, अभ्रक भस्म, प्रवाल भस्म के योग , त्रैलोक्य चिंतामणी रस , जय मंगल रस , त्रिभुवन कीर्ति रस, लक्ष्मी विलास रस आदि प्रमुख हैं। ये सारी दवाइयां श्वांस, बुखार, कफ को दूर करने के साथ ही पाचन और दीपन की क्रियाओं को बढ़ाती है। उन्होंने बताया कि ये औषधियां ऑनलाइन और ऑफलाइन मेडिकल दुकानों पर उपलब्ध रहती हैं। ये सभी रस शास्त्रीय चिकित्सकीय ग्रंथो में काफी विस्तारपूर्वक वर्णित हैं।दरअसल, भारत अनेक प्रतिष्ठित आयुर्वेदिक चिकित्सक इन वर्णित रस-रसायनों के माध्यम से महामारी की लाक्षणिक चिकित्सा कर रोगियों को स्वस्थ करने में सफल भी हो रहे हैं। यही नहीं एलोपैथ भी इस महामारी की लाक्षणिक चिकित्सा ही कर रही है। वहीं, दुनिया के किसी भी शोध संस्थान द्वारा इस महामारी की शत-प्रतिशत प्रभावी औषधि अब तक विकसित नहीं की जा सकी है। प्रोफेसर चौधरी के अनुसार इन रस औषधियों जैसे कि स्वर्ण, अभ्रक, माक्षिक भस्म के ऊपर निरतंर शोध पत्र प्रकाशित होते रहे हैं, जो कि इनकी व्याधि हरण की क्षमता, त्वरित लाभ, स्वास्थ्य सुरक्षा के मानकों पर खरी उतरी है। वहीं इन रस-रसायनों को खरीदते समय कंपनी की प्रमाणिकता को अवश्य परखे।

पंजाब, जेएनएन। कोरोना काल में काढ़ा का अत्यधिक प्रयोग पाचनशक्ति को खराब करने लगा और लोग कोविड के दूसरे लहर में इस आयुर्वेदिक युक्ति से अब पीछा छुड़ाते दिख रहे हैं। By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब वहीं आम आदमी से लेकर समस्त बुद्धिजीवियों में भी यही भ्रांति अभी तक चली आ रही थी कि कोरोना से निबटने में आयुर्वेद की सीमाएं महज काढ़ा तक ही हैं, जबकि आयुर्वेदीय चिकित्सा शास्त्र में कोविड बीमारी में लक्षण के अनुसार इलाज करने की प्रबल संभावनाएं हैं। 
बीएचयू में रसशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. आनंद चौधरी ने बताया कि आयुर्वेद में आयुष काढ़ा' ही नहीं बल्कि विभिन्न रस औषधियां भी कोविड-19 के इलाज में कारगर हैं।

आयुर्वेदीय रस शास्त्र की विधा में अनेक रस रसायन सुखद परिणाम के साथ विकसित किए गए हैं, जो कि इस महामारी से स्वयं को बचाने में काफी अचूक दवाएं हैं।इन औषधियों में स्वर्ण भस्म का योग स्वर्ण मालिनी बसंत, अभ्रक भस्म, प्रवाल भस्म के योग , त्रैलोक्य चिंतामणी रस , जय मंगल रस , त्रिभुवन कीर्ति रस, लक्ष्मी विलास रस आदि प्रमुख हैं। ये सारी दवाइयां श्वांस, बुखार, कफ को दूर करने के साथ ही पाचन और दीपन की क्रियाओं को बढ़ाती है। उन्होंने बताया कि ये औषधियां ऑनलाइन और ऑफलाइन मेडिकल दुकानों पर उपलब्ध रहती हैं। ये सभी रस शास्त्रीय चिकित्सकीय ग्रंथो में काफी विस्तारपूर्वक वर्णित हैं।

दरअसल, भारत अनेक प्रतिष्ठित आयुर्वेदिक चिकित्सक इन वर्णित रस-रसायनों के माध्यम से महामारी की लाक्षणिक चिकित्सा कर रोगियों को स्वस्थ करने में सफल भी हो रहे हैं। यही नहीं एलोपैथ भी इस महामारी की लाक्षणिक चिकित्सा ही कर रही है। वहीं, दुनिया के किसी भी शोध संस्थान द्वारा इस महामारी की शत-प्रतिशत प्रभावी औषधि अब तक विकसित नहीं की जा सकी है। प्रोफेसर चौधरी के अनुसार इन रस औषधियों जैसे कि स्वर्ण, अभ्रक, माक्षिक भस्म के ऊपर निरतंर शोध पत्र प्रकाशित होते रहे हैं, जो कि इनकी व्याधि हरण की क्षमता, त्वरित लाभ, स्वास्थ्य सुरक्षा के मानकों पर खरी उतरी है। वहीं इन रस-रसायनों को खरीदते समय कंपनी की प्रमाणिकता को अवश्य परखे।

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प्रत्येक इंसान चाहता है कि उसका शरीर ताकतवर रहे, स्वस्थ रहें । अधिकतर पुरुषों में कमजोरी का प्रभाव देखने को मिलता है जिसका कारण है उनका गलत खानपान । आज हम आपको उन तीन चीजों के बारे में बताने वाले हैं जिनका यदि लगातार सेवन किया जाए तो 1 महीने से भी कम समय में शरीर बलवान बन जाएगा । Vnita punjab आंवला –आंवला में विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इन्फ्लेमेटरी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं । जो पुरुषों को दीर्घायु प्रदान करते हैं । आंवला खाने से बाल काले, लंबे एवं घने होते हैं । त्वचा जवान दिखती है, स्कीन का रंग साफ होता है । आंवले का मुरब्बा या आचार इस्तेमाल कर सकते हैं । Vnita Kasnia खजूर –खजूर में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन के, विटामिन ए, कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं । जो शरीर को मजबूत और ताकतवर बनाते हैं । सुबह के नाश्ते में दूध के साथ खजूर का सेवन करने से मांसपेशियों का विकास होता है और शरीर में ताकत आती है Vnita punjab किशमिश –किशमिश में कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम, आयरन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो मजबूत शरीर बनाने के लिए पर्याप्त है । किशमिश का सेवन लगातार करने से कब्ज की समस्या दूर होती है और स्टेमिना बढ़ाती है ।https://www.facebook.com/%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%B5%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%86%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AE-101621781784017/

🙏: आंवला –आंवला में विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इन्फ्लेमेटरी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं । जो पुरुषों को दीर्घायु प्रदान करते हैं । आंवला खाने से बाल काले, लंबे एवं घने होते हैं । त्वचा जवान दिखती है, स्कीन का रंग साफ होता है । आंवले का मुरब्बा या आचार इस्तेमाल कर सकते हैं । Vnita Kasnia खजूर –खजूर में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन के, विटामिन ए, कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं । जो शरीर को मजबूत और ताकतवर बनाते हैं । सुबह के नाश्ते में दूध के साथ खजूर का सेवन करने से मांसपेशियों का विकास होता है और शरीर में ताकत आती है Vnita punjab किशमिश –किशमिश में कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम, आयरन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो मजबूत शरीर बनाने के लिए पर्याप्त है । किशमिश का सेवन लगातार करने से कब्ज की समस्या दूर होती है और स्टेमिना बढ़ाती है ।,

Covid 19 Covid-Omicron XBB की यह लहर Covid-19 की पहली लहर से भी घातक है। *एक्सबीबी वेरिएंट*😷 By वनिता कासनियां पंजाब द्वारा आइए निम्नलिखित सूचनाओं पर ध्यान दें: सभी को मास्क पहनने की सलाह दी जाती है क्योंकि COVID-Omicron XBB कोरोनावायरस का नया संस्करण अलग, घातक और सही तरीके से पता लगाना आसान नहीं है। नए वायरस COVID-Omicron XBB के लक्षण निम्नलिखित हैं: 1. खांसी नहीं होती है। 2. बुखार नहीं है। इनमें से कुछ सीमित संख्या में ही होंगे: 3. जोड़ों का दर्द। 4. सिरदर्द। 5. गर्दन में दर्द। 6. ऊपरी कमर दर्द। 7. निमोनिया। 8. आमतौर पर भूख नहीं लगती है। COVID-Omicron XBB डेल्टा संस्करण की तुलना में 5 गुना अधिक विषैला है और इसकी तुलना में मृत्यु दर अधिक है। स्थिति को चरम गंभीरता तक पहुंचने में कम समय लगता है और कभी-कभी कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते हैं। आइए अधिक सावधान रहें! वायरस का यह तनाव नासॉफिरिन्जियल क्षेत्र में नहीं पाया जाता है और अपेक्षाकृत कम समय के लिए सीधे फेफड़ों को प्रभावित करता है। कोविड-ओमिक्रॉन एक्सबीबी के निदान वाले कई रोगियों को ज्वरनाशक और दर्द रहित के रूप में वर्गीकृत किया गया था, लेकिन एक्स-रे में हल्का छाती निमोनिया दिखा। कोविड-ओमिक्रॉन एक्सबीबी के लिए नेज़ल स्वैब परीक्षण अक्सर नकारात्मक होते हैं, और झूठे नकारात्मक नासॉफिरिन्जियल परीक्षणों के मामले बढ़ रहे हैं। इसका मतलब है कि वायरस समुदाय में फैल सकता है और सीधे फेफड़ों को संक्रमित कर सकता है, जिससे वायरल निमोनिया हो सकता है, जो बदले में तीव्र श्वसन संकट का कारण बनता है। यह बताता है कि क्यों कोविड-ओमिक्रॉन एक्सबीबी बहुत संक्रामक, अत्यधिक विषैला और घातक बन गया है। सावधानी, भीड़-भाड़ वाली जगहों से बचें, खुले स्थानों में भी 1.5 मीटर की दूरी बनाए रखें, डबल-लेयर मास्क पहनें, उपयुक्त मास्क पहनें, हाथों को बार-बार धोएं, भले ही हर कोई स्पर्शोन्मुख (खांसने या छींकने वाला) न हो। Covid-Omicron XBB की यह लहर Covid-19 की पहली लहर से भी घातक है। इसलिए हमें बहुत सावधान रहना होगा और कोरोनावायरस के खिलाफ कई प्रबलित सावधानियां बरतनी होंगी। अपने मित्रों और परिवार के साथ सतर्क संचार बनाए रखें। इस जानकारी को अपने तक न रखें, इसे परिवार के अन्य सदस्यों और दोस्तों के साथ साझा करें। *2023 का TASK,* *भीड़ में 😷 MASK !* *'नए वेरियंट से डरिए नहीं, अलर्ट रहिए*

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After coming to Corona positive, those who gain victory over Kovid will also be provided with oxygen concentrator according to the doctor's advice on providing oxygen.By philanthropist Vanita Kasaniya Panj

कोरोना पाजिटिव आने के उपरांत जो व्यक्ति कोविड पर फतेह हासिल कर लेते हैं, उन्हें आगे भी आक्सीजन दिए जाने संबंधी डाक्टरी सलाह अनुसार आक्सीजन कंसंट्रेटर मुहैया करवाए जाएंगे। By समाजसेवी वनिता कसनिया पंजाब डिप्टी कमिश्नर हरीश नायर ने बताया कि जिले के सिविल अस्पताल फाजिल्का, अबोहर और जलालाबाद में इसके अंतर्गत आक्सीजन बैंक स्थापित किए गए हैं। डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि इस आक्सीजन बैंक को सुचारू ढंग के साथ चलाने के लिए सिविल अस्पतालों में नोडल अफसर भी नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने बताया कि सिविल अस्पताल फाजिल्का में डा. सुधीर पाठक, सिविल अस्पताल अबोहर में डा. गगनदीप सिंह और सिविल अस्पताल जलालाबाद में डा. दविन्दर कुमार इसकी पूरी देख-रेख करेंगे और जरूरतमंद मरीज इन अधिकारियों के साथ संपर्क कर सकते हैं।सिविल सर्जन डा. परमिन्दर कुमार ने बताया कि यह हिदायतें मौजूदा कोरोना पीड़ितों पर लागू नहीं होंगी। उन्होंने कहा कि घर में आक्सीजन कंसंट्रेटर देने की सुविधा डाक्टर की सलाह अनुसार ही दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जिले के आक्सीजन बैंक से ही 5 लीटर या उससे कम मात्रा वाला आक्सीजन कंसंट्रेटर जरूरतमंद व्यक्ति को...